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करवा चौथ व्रत 2026 — विधि, कथा एवं पूजा मार्गदर्शन

पंडित गिरीश चंद्र पर्गाईं द्वाराअपडेट 29 सितंबर 20266 मिनट

करवा चौथ सुहागिन स्त्रियों द्वारा अपने पति की दीर्घायु एवं कुशलता हेतु रखा जाने वाला दिन भर का व्रत है, जो संध्या को चंद्र दर्शन के बाद ही खोला जाता है। यह सूर्योदय से पूर्व सरगी से आरंभ होता है, दिन भर निर्जला रहता है, और करवा चौथ कथा, भगवान शिव, पार्वती, गणेश एवं कार्तिकेय की पूजा तथा चंद्रमा को अर्घ्य के साथ पूर्ण होता है। चंद्रोदय का समय हर शहर में अलग होता है, इसलिए अपने स्थानीय पंचांग या पंडित से अवश्य पूछें।

करवा चौथ क्या है?

करवा चौथ कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को आती है। 'करवा' पूजा में प्रयुक्त मिट्टी का पात्र है और 'चौथ' का अर्थ चतुर्थी। पत्नियाँ पति की दीर्घायु, आरोग्य एवं सुखी दांपत्य की कामना से यह व्रत रखती हैं; कई परिवारों में अविवाहित कन्याएँ भी अच्छे वर हेतु यह व्रत रखती हैं।

करवा चौथ व्रत की विधि कैसी होती है?

दिन का आरंभ भोर से पूर्व सरगी से होता है — सास द्वारा भेजा भोजन एवं उपहार — जो सूर्योदय से पहले ग्रहण किया जाता है। इसके बाद स्त्री निर्जला व्रत रखती है। संध्या को श्रृंगार कर करवा (पात्र), जल, रोली, अक्षत, दीप एवं व्रत कथा के साथ पूजा की जाती है। चंद्र दर्शन कर, छलनी से अर्घ्य देकर, पति के हाथों जल एवं भोजन ग्रहण कर व्रत खोला जाता है।

करवा चौथ की कथा

संध्या पूजा में करवा चौथ कथा सुने बिना व्रत अधूरा है। सर्वाधिक प्रसिद्ध वीरावती की कथा है, जिसके भाइयों ने छल से उसका व्रत जल्दी तुड़वा दिया; भूल का आभास होने पर उसने पूर्ण श्रद्धा से पुनः व्रत रखा और उसके पति का जीवन लौट आया। कथा श्रद्धा, धैर्य एवं सच्चाई सिखाती है।

चंद्रोदय का समय कब है?

करवा चौथ पर चंद्रोदय संध्या को देर से होता है और सटीक समय हर शहर में भिन्न होता है। किसी एक निश्चित समय पर निर्भर न रहें — अपने स्थानीय पंचांग, विश्वसनीय ऐप, या पंडित से अपने शहर का चंद्रोदय पूछें ताकि सही समय पर व्रत खोलें।

करवा चौथ पूजा मार्गदर्शन कैसे पाएँ?

सही विधि, कथा, अपने शहर का शुभ चंद्र समय, या अपनी ओर से विशेष पूजा/संकल्प कराने हेतु अनुभवी हरिद्वार पंडित को व्हाट्सएप करें। मार्गदर्शन ईमानदार एवं सरल है — बिना भय, बिना दबाव — और कोई भी पूजा शुल्क बुकिंग से पहले स्पष्ट बताया जाता है।

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